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अपनी कार्यशैली से निराश करते नेता

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नेता मात्र राजनैतिक दल का सदस्य नहीं अपितु समाज को कहाँ ले जाकर खड़ा करना है इसका निर्णायक भी होता है | नेता की चाल, ढाल, चरित्र, संवाद कार्यशैली इत्यादि का अनुपालन पूरा समाज करता है |

परन्तु यक्ष प्रश्न यह है की क्या वर्तमान परिदृश्य मे कोई ऐसा नेता है जिसको “जननेता” कहा जा सके?
पूर्वकाल मे श्री लाल बहादुर शास्त्री जी, जो 2-3 जोड़ी कपड़ो से ज्यादा संग्रह नहीं करते थे |

श्री अटल बिहारी बाजपेई जी जिनकी अनुशासित व्यंग्मई और सीधे जनता के ह्रदय को भेद देने वाली वाणी का कायल विपक्ष भी हुआ करता था और मुक्त कंठ से उनके भाषणों कि प्रशंसा किया करता था |

श्री प्रणव मुखर्जी जी जिनके डांट देने पर विपक्ष के बड़े नेता भी शालीनता से अपनी कुर्सी कि और उन्मुख हो जाते थे |

अन्य कई उदाहरण देश कई संसद और देश की जनता ने देखे है और वर्तमान परिदृश्य मे यह कहा जा सकता है की अब ये घटनाये इतिहास बन कर बीत चुकी और विलुप्त होने के कगार पर है |

जनतांत्रिक व्यवस्था मे नेता का कद तय करने वाले अनेको तत्वों मे से सबसे महत्वपूर्ण है उसकी दृष्टि (vision), सामाजिक राजनैतिक आर्थिक राष्ट्रीय परिस्थितियों को देख कर भांप कर सपने सजोना और उन सपनो को पूरा करने का साहस रखना |

उसके विपरीत अब स्वप्न देखे नहीं बल्कि जनता को दिखाए जाते है और इन दिखाए जाने वाले स्वप्नो का आधार होता है सोशल मीडिया मे चर्चित मुद्दे जो मुद्दा ज्यादा गरमाया है उससे संबंधित अवयवो को लेकर जनता के मध्य बने रहो जैसे जैसे मुद्दे सोशल मीडिया पर बदलते है वैसे वैसे नेता जी के स्वर विडंबना है परन्तु सत्य है |

कभी संसद मे बैठकर कार्यवाही को देखिये क्या यह वही लोकतंत्र है जिसके विषय मे हमको आपको स्कूली किताबों मे पढ़ाया गया था?
कहाँ गयी वह प्रतिष्ठित संवाद की परम्परा?
क्या देश के लिए नियम कानून बनाने वाले ऐसे होते है जो अध्यक्ष की कुर्सी के समीप जाकर हंगामा बरपाने लग जाए?
इस आधार पर एक छात्र का अपने कुलपति या प्राचार्य के कक्ष मे तोड़फोड़ कर देना उदंडतापूर्ण व्यवहार का परिचय देना गलत कहा जाएगा?

राजनीति का एक बीज छात्र राजनीती भी है और छात्र अपनी राजनीति की कार्यशैली को विधायकों सांसदों की कार्यशैली जैसा ही बनाना चाहते है इसका अंदाजा छात्र नेताओं के कॉटन वाले बेहतरीन सफ़ेद कुर्तो और पास चल रहे सेवदारों को देखकर लगाया जा सकता है |

सरकारे गलत, नीतियाँ गलत, समाज गलत ऐसे बयान देने के पहले नेताओं को स्वयं के आंकलन की घोर आवश्यकता है आप जैसा रहेंगे वैसा ही दिखेंगे और जैसा आप दिखेंगे वैसा ही आपके अनुयायी पालन करेंगे |

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